विरह मधुर हल आजि मधुराते
Biraha modhur holo
प्रेम
विरह मधुर हल आजि मधुराते। गभीर रागिणी उठे वाजि वेदनाते॥ भरि दिय़ा पूर्णिमानिशा अधीर अदर्शनतृषा की करुण मरीचिका आने आँखिपाते॥ सुदूरेर सुगन्धधारा वाय़ुभरे पराने आमार पथहारा घुरे मरे। कार वाणी कोन् सुरे ताले मर्मरे पल्लवजाले, वाजे मम मञ्जीरराजि साथे साथे॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Biraho modhur holo aaji modhuraate. Gobhiro raagini utthe baaji bedonate. Bhori diya purnimanisha adhiro adarshanotrisha Ki koruno morichika aane aankhipaate. Sudurer sugandhodhaara baayubhore Porane aamar pathohaara ghure mare. Kaar baani kon sure taale marmare pallabojaale, Baaje mamo monjiroraaji saathe saathe.
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सुरेन्द्रनाथ बंदोपाध्याय1886–1972Musician of the Vishnupur gharana, known as Sangitratnakar, and a notator of Rabindrasangeet.Eastern Zonal Cultural Centre, from the documentary “The Vishnupur Gharana” · Wikimedia Commons, CC BY 3.0 - रचनाकाल
- 1910(১৩১৭)
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