दाँड़ाओ, मन, अनन्त व्रह्माण्ड-माझे
Darao mon ananta
पूजा
२६१
दाँड़ाओ, मन, अनन्त व्रह्माण्ड-माझे आनन्दसभाभवने आज॥
विपुलमहिमामय़, गगने महासने विराज करे विश्वराज॥
सिन्धु शैल तटिनी महारण्य जलधरमाला
तपन चन्द्र तारा गभीर मन्द्रे गाहिछे शुन गान।
एइ विश्वमहोৎसव देखि मगन हल सुखे कविचित्त,
भुलि गेल सव काज॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Dnaarao, mon, anonto bromhando-maajhe aanondosabhabhabone aaj. Bipulomohimamoy, gagone mahasane biraj kabe bishworaaj. Sindhu shoilo totinee maharanyo jalodharomaala Tapon chandro taara gobheer mondre gaahichhe shuno gaan. Ei bishwomahotsab dekhi magon holo sukhe kobichitto. Bhuli gelo sob kaaj.
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सुरेन्द्रनाथ बंदोपाध्याय1886–1972Musician of the Vishnupur gharana, known as Sangitratnakar, and a notator of Rabindrasangeet.Eastern Zonal Cultural Centre, from the documentary “The Vishnupur Gharana” · Wikimedia Commons, CC BY 3.0 - रचनाकाल
- 1909(১৩১৬)
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