दय़ा दिय़े हवे गो मोर
Doya diye hobe go mor
पूजा
४८८
दय़ा दिय़े हवे गो मोर जीवन धुते।
नइले कि आर पारव तोमार चरण छुँते॥
तोमाय़ दिते पूजार डालि वेरिय़े पड़े सकल काली,
परान आमार
पारि ने ताइ पाय़े थुते॥
एत दिन तो छिल ना मोर कोनो व्यथा,
सर्व अङ्गे माखा छिल मलिनता।
आज ओइ शुभ्र कोलेर तरे व्याकुल हृदय़ केँदे
मरे–
दिय़ो ना गो दिय़ो ना आर धुलाय़ शुते॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Daya diye habe go mor jiban dhute. Noile ki aar paarbo tomar charon chhnute. Tomay dite pujar daali beriye pare sakol kaali, Paran aamar paari ne taai paaye thute. Eto din to chhilo na mor kono byatha, Sarbo ange maakha chhilo molinata. Aaj oi subhro koler tare byakul hriday knede mare - Diyo na go, diyo na aar dhulay shute.
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सुरेन्द्रनाथ बंदोपाध्याय1886–1972Musician of the Vishnupur gharana, known as Sangitratnakar, and a notator of Rabindrasangeet.Eastern Zonal Cultural Centre, from the documentary “The Vishnupur Gharana” · Wikimedia Commons, CC BY 3.0 / भीमराव शास्त्री - रचनाकाल
- 7 June 1910(২৪ জ্যৈষ্ঠ ১৩১৭)
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