हे विरही, हाय়, चञ्चल हिय়ा तव—
He birohi hay 2
श्यामा Shyama से · दृश्य 2
हे विरही, हाय়, चञ्चल हिय়ा तव— नीरवे जाग एकाकी शून्य मन्दिरे, कोन् से निरुद्देश-लागि आछ जागिय়ा । स्वपनरूपिणी अलोकसुन्दरी अलक्ष्य अलकापुरी-निवासिनी, ताहार मुरति रचिले वेदनाय় हृदय়माझारे ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Hey birohi, haay, chanchalo hiya tabo - Nirabe jaago ekaki shunyo mondire, Kon se niruddesh-laagi aachho jaagiya. Swaponrupini aloksundori Alokkho alokaapuri- nibashini, Taahar muroti rochile bedonay hridayomaajhare.
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- पर्याय
- श्यामा · 310(শ্যামা)
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- संकलन
- श्यामा(শ্যামা)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबितन १९ (श्यम)(স্বরবিতান ১৯ (শ্যামা))
- स्वरलिपि
- सुशिलकुमार भञ्ज चौधरी
- रचनाकाल
- 1936(১৩৪৩)
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