হে বিরহী, হায়, চঞ্চল হিয়া তব—
He birohi hay 2
Shyama Shyama से · दृश्य 2
हे विरही, हाय়, चञ्चल हिय়ा तव— नीरवे जाग एकाकी शून्य मन्दिरे, कोन् से निरुद्देश-लागि आछ जागिय়ा । स्वपनरूपिणी अलोकसुन्दरी अलक्ष्य अलकापुरी-निवासिनी, ताहार मुरति रचिले वेदनाय় हृदय়माझारे ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Hey birohi, haay, chanchalo hiya tabo - Nirabe jaago ekaki shunyo mondire, Kon se niruddesh-laagi aachho jaagiya. Swaponrupini aloksundori Alokkho alokaapuri- nibashini, Taahar muroti rochile bedonay hridayomaajhare.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Shyama · 310(শ্যামা)
- उप-पर्याय
- Prem-Boichitra
- राग
- Behag(বেহাগ)
- ताल
- Kaharwa(কাহারবা)
- संकलन
- Shyama
- स्वरबितान खण्ड
- 19 (Shyama)
- स्वरलिपि
- Sushilkumar Bhanja Chowdhury
- रचनाकाल
- 1936(১৩৪৩)
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