কে এল আজি এ ঘোর নিশীথে
Ke elo aji
के एल आजि ए घोर निशीथे साधेर कानने शान्ति नाशिते । मत्त करी यत पद्मवन दले विमल सरोवर मन्थिय়ा, घुमन्त विहगे केन वधे रे सघने खर शर सन्धिय়ा ! तरासे चमकिय়े हरिण हरिणी स्खलित चरणे छुटिछे ! स्खलित चरणे छुटिछे कानने, करुणनय়ने चाहिछे । आकुल सरसी, सारस सारसी शरवने पशि काँदिछे । तिमिर दिगभरि घोर यामिनी, विपद घनछाय়ा छाइय়ा । कि जानि कि हवे, आजि ए निशीथे, तरासे प्राण ओठे काँपिय়ा !
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Ke elo aaji e ghor nishithe, Saadhero kaanane shaanti naashite. Matto kori jato paddobono dale Bimalo sarobaro monthiya, Ghumanto bihage keno bodhe re Saghane kharo sharo sondhiya ! Tarase chamokiye horino-horini Skholito charone chhutichhe ! Skholito charone chhutichhe kaanone, Koruno-nayone chaahichhe. Aakul sarosi, saaraso-saarosi Sharo-bone poshi knaadichhe. Timir dig bhori ghoro jaamini, Bipad ghano chhaaya chhaaiya. Ki jaani ki habe aaji e nishithe, Tarase praan otthe knaapiya.
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- पर्याय
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- Kaal-mrigaya
- स्वरबितान खण्ड
- 29
- स्वरलिपि
- Indira Debi Chowdhurani
- रचनाकाल
- 1882(১২৮৯)
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