के एल आजि ए घोर निशीथे
Ke elo aji
के एल आजि ए घोर निशीथे साधेर कानने शान्ति नाशिते । मत्त करी यत पद्मवन दले विमल सरोवर मन्थिय়ा, घुमन्त विहगे केन वधे रे सघने खर शर सन्धिय়ा ! तरासे चमकिय়े हरिण हरिणी स्खलित चरणे छुटिछे ! स्खलित चरणे छुटिछे कानने, करुणनय়ने चाहिछे । आकुल सरसी, सारस सारसी शरवने पशि काँदिछे । तिमिर दिगभरि घोर यामिनी, विपद घनछाय়ा छाइय়ा । कि जानि कि हवे, आजि ए निशीथे, तरासे प्राण ओठे काँपिय়ा !
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Ke elo aaji e ghor nishithe, Saadhero kaanane shaanti naashite. Matto kori jato paddobono dale Bimalo sarobaro monthiya, Ghumanto bihage keno bodhe re Saghane kharo sharo sondhiya ! Tarase chamokiye horino-horini Skholito charone chhutichhe ! Skholito charone chhutichhe kaanone, Koruno-nayone chaahichhe. Aakul sarosi, saaraso-saarosi Sharo-bone poshi knaadichhe. Timir dig bhori ghoro jaamini, Bipad ghano chhaaya chhaaiya. Ki jaani ki habe aaji e nishithe, Tarase praan otthe knaapiya.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इंटरैक्टिव स्वरलिपि जल्द ही आ रही है।
यूट्यूब पर
- पर्याय
- कालमृगया(কালমৃগয়া)
- उप-पर्याय
- बल्मिकि-प्रतिभ(বল্মিকি-প্রতিভ)
- राग
- मिश्र-मल्हर(মিশ্র-মল্হার)
- ताल
- तेयोर(তেওরা)
- घराना
- हिन्दुस्तानी(হিন্দুস্তানি)
- संकलन
- काल-मृगया(কাল-মৃগয়া)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन २९(স্বরবিতান ২৯)
- स्वरलिपि
- इंदिरा देवी चौधरनी
इंदिरा देवी चौधरनी1873–1960Rabindranath's niece — scholar, translator and musician, who set down a great many of his songs in notation.Photographer unknown, c. 1890 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1882(১২৮৯)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।