रोदनभरा ए वसन्त सखी
Rodanbhora e basanta
चित्रांगदा Chitrangada से · दृश्य 2
रोदनभरा ए
वसन्त सखी, कखनो आसे नि वुझि आगे
।
मोर
विरहवेदना राङालो किंशुकरक्तिमरागे॥
कुञ्जद्वारे वनमल्लिका सेजेछे परिय़ा नव पत्रालिका,
सारा दिन-रजनी अनिमिखा कार पथ चेय़े जागे॥
दक्षिणसमीरे दूर
गगने एकेला विरही गाहे वुझि गो।
कुञ्जवने मोर मुकुल
यत आवरणवन्धन छिँड़िते चाहे।
आमि ए प्राणेर रुद्ध द्वारे व्याकुल कर हानि वारे वारे–
देओय़ा हल ना ये आपनारे एइ व्यथा मने लागे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Rodonobhara e basonto Sokhi, khakhono aase ni bujhi aage. Mor birahobedona raangalo Kinsukokoroktimoraage Kunjadware banomollika Sejechhe poriya nabo patralika, Saara din-rajoni animikha Kaar patho cheye jaage. Dakkhinosomire dur gagone Ekela birohi gaaye bujhi go. Kunjobone mor mukul jato Aboranobandhon chhnirite chaahe. Aami e praaner rudho dwaare Byakulo karo haani baare bare - Dewa holo na je aaponare Ei byatha mone laage.
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- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- 1936(১৩৪৩)
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