सव किछु केन निल ना
Sab kichhu keno nilo na
श्यामा Shyama से · दृश्य 4
सव-किछु केन निल ना, निल ना, निल ना भालोवासा– भालो आर मन्देरे। आपनाते केन मिटालो ना यत किछु द्वन्द्वेरे– भालो आर मन्देरे॥ नदी निय़े आसे पङ्किल जलधारा, सागरहृदय़े गहने हय़ हारा। क्षमार दीप्ति देय़ स्वर्गेर आलो प्रेमेर आनन्देरे– भालो आर मन्देरे॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Sab-kichhu keno nilo na, nilo na, nilo na bhaalobasa - Bhaalo aar mandere. Aaponate keno mitalo na jatokichhu dwandere - Bhaalo aar mondere. Nodi niye aase ponkil jalodhaara, saagorhridaye gahone hoy haara, Khamar dipti dey swarger aalo premer aanondere - Bhaalo aar mondere.
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- स्वरलिपि
- सुशिलकुमार भञ्ज चौधरी
- रचनाकाल
- 1937(১৩৪৪)
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